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मन

ये कविता इंसान के मन के कभी निराश और खुश रहने के बारे में है

Bikesh 20 अगस्त 2026 1 मिनट पठन
मन
रोता मन किसको अच्छा लगता है सबको तो बस हंसता चेहरा अच्छा लगता है
कभी हंसते चेहरे के पीछे अपने मन को देखिए क्या आपका भी मन हंसता है या रोता है
कभी कोई मन को मारता है कभी मन को बहलाता है अगर मन खुद हंस दे तो यह जीवन सफल है क्योंकि यह चेहरा तो मुखौटा है असली रूप तो मन का है जो मन से प्रफुल्लित है वह दुख में भी खुश है और जो खुद को बेहतर करता है वह मन से मजबूत होता है
जो मन से खुश है उसका चेहरा बता देता है की हर हालात को वह जी लेता है रोता मन किसको अच्छा लगता है सबको तो बस हसता चेहरा अच्छा लगता है

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