
मुर्दा समाज
जब कोई खबर नज़रअंदाज होती है तब वह समाज के मुर्दा होने की पहचान है
Bikesh 1 मिनट पठन

जब कोई खबर नज़रअंदाज होती है तब वह समाज के मुर्दा होने की पहचान है

जब कोई खुद को तराशता है तब उसकी बनावट तय करती है उसका आकार क्या होगा।

कविता ये कहती है कि किस प्रकार एक बेरोजगार व्यक्ति समाज का सबसे संघर्षशील व्यक्ति होता है

ये कविता एक प्रेमी के गुज़र जाने के बाद उसके साथी के मन की दास्तां है

ये कविता हम सब के रिश्ते को एक समझ प्रदान करती है

ये कविता इंसान के मन के कभी निराश और खुश रहने के बारे में है

नारीवादी पर एक काव्यात्मक कविता।

ये कविता मानव चेतना को दिखता है बिल्कुल धुंध की तरह।

प्रेम पर लिखी हुई कविता अक्सर खूबसूरत होती है

यह कविता बचपन के घर के ऊपर है जिसमें बचपन के घर को एक आशियाने के रूप में संजोया गया है

यह कविता प्रकृति के सौंदर्य पर है