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मुर्दा समाज

जब कोई खबर नज़रअंदाज होती है तब वह समाज के मुर्दा होने की पहचान है

Bikesh 1 सितंबर 2026 1 मिनट पठन
मुर्दा समाज
एक खबर ने समाज को मुर्दा कहा - एक पल को लगा क्या समाज भी मुर्दा होता है? फिर खबर को सुना तो यकीनन ऐसा ही लगा।
जब जनता तमाशा भी नहीं देखती, तब सचमुच समाज मुर्दा बन जाता है।
सत्ता वाली दुनिया में अगर कोई घटना नज़रअंदाज़ होती है, तो वह समाज के मुर्दा होने की सच में एक पहचान है।
ये दुनिया सिर्फ उन्हीं की है, जो इस मुर्दा समाज से बातें कर सकते हैं; और वही लोग यहाँ के असली नेता हैं।

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