
ये मौसम अब बदल गया है
ठंड में दस्तक दे दी है
जीवन के धुंध के साथ
मौसम के कोहरे का
मिलन हो गया है।
अब इंतजार है तेज प्रकाश का
जब ये धुंध हमें रास्ता देगा
खिल उठेगी बगियां
और बसंत का आगमन होगा।
धूमिल हो गया है मेरा घर
कोहरे की धुंधलाहट में,
मौसम के हिसाब से
सबने बदल लिए अपने रास्ते,
कोई गुजरता भी है
मेरे आशियाने के बगल से
तो उसे मेरा घर नहीं
सिर्फ उसे उसका सीमित
नजरिया दिखाई मालूम पड़ता है
तरक्कियों की राह पर था मैं,
पर धुंध ने अब बसंत तक
इंतजार करने को कहा है
कुछ महीने और मुझे
रजाई और कंबल के गर्माहट में
अपने वक्त को खाली करने को कहा है
ये मौसम अब बदल गया है
मेरी मेहनत के दिन
अब आग की भट्टी पर
आराम कर रहे हैं
और अकेले इस आशियाने में
ये धुंध मेरी पहरेदार बनी हुई है


