
पत्तों के गिरने से
डालियाँ बिखर जाती हैं
जिंदगी की ख्वाहिशें भी
पत्तों सी ही चुपचाप झर जाती हैं
पूरी उम्र बीत जाती है
अपने अनुभवों को
पेड़ की डालियों सा गूंथने में,
मगर एक क्षण का झोंका
सारी मेहनत को
गलतियों में बदल देता है
सुना है
आसमान नीला होता है
इंसान आज़ाद होता है
सुना है, हर हार के बाद
जीत होती है
जीत की खुशियां नई
उम्मीद के रंग बिखेरती है
हर उमंग की फिजा में
कोई अनकहा सुनापन रह जाता है
लगता है
किसी अनदेखी नज़र ने
फ़िज़ाओं से रंग चुरा लिये हो
और रंगीन ज़िंदगी
अचानक बेरंग हो गई हो।


