
चमचमाती रौशनी है बरामदे पर
कुर्सी पर बैठे
टेबल पर अपने पाऊं टिकाए
चश्मे को खुद से दूर रख कर,
एक टक
उस बल्ब को देख रहा हूँ
और बाहर की दुनिया ने
अपनी आवाजाही बंद कर दी है
रात अब अपने चरम पर है
खानपान के बाद
बिस्तर को मैंने पकड़ लिया है
कमरे में उजाला है
और अंधेरे को
क़व्वाली सुला रहा है
नींद को मैं
महसूस कर पा रहा हूँ
आज अब पूर्ण होने को आया है
और सवेरा कल के इंतज़ार में
मेरे साथ सो रहा है


